शादी सीज़न: डीजे बाबू बनाम नींद
शादी सीज़न आते ही जयपुर की गलियों में दो चीज़ें सबसे तेज़ चलती हैं: मिठाई की खुशबू और डीजे का बास। रात को बारात निकलती है, और म्हारे घर की छत पर हर धुन सीधा दिल नहीं, तकिया हिलाती है। कोई कहता है, “बस दो गाने और,” पर डीजे वाले बाबू को लगता है अभी तो असली कार्यक्रम शुरू हुआ है। सबसे मज़ेदार दृश्य पड़ोसी का होता है। एक तरफ दादी चुनरी ओढ़ कर भी जागती रहती हैं, दूसरी तरफ बच्चा गीली आँखों से स्कूल की चिंता भूल कर थोड़ा नाच लेता है। घणी मुश्किल यह नहीं कि शादी हो रही है; मुश्किल यह है कि सुबह अलार्म भी डीजे जैसा ही सुनाई देने लगता है। सच्ची, जयपुर में शादी सीज़न में नींद का भी निमंत्रण-पत्र अलग से चाहिए।
